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बढ़ते होर्मुज विवाद में रूस-चीन की एंट्री, वैश्विक तेल संकट की चिंता और गहरी

United States के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा Strait of Hormuz में नाकेबंदी के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस कदम से वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका के बीच अब Russia और China भी सक्रिय हो गए हैं।

रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बीजिंग का दौरा कर रहे हैं। वे Wang Yi के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंचेंगे, जहां दोनों देश होर्मुज की स्थिति, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत करेंगे।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह उन जहाजों को रोक सकता है, जो ईरान को शुल्क देकर इस जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। इस फैसले का असर खास तौर पर चीन पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद Iran से बड़े पैमाने पर तेल आयात करता रहा है।

China ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने कहा कि रूस और चीन के बीच इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

इससे पहले Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत विफल रही, जिसके बाद Donald Trump ने होर्मुज में नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की। वहीं ईरान ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो फारस की खाड़ी और Gulf of Oman क्षेत्र में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी।

चीन ने हालांकि उम्मीद जताई है कि दोनों पक्ष सीजफायर को बनाए रखेंगे और विवाद को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश करेंगे।

कुल मिलाकर, Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता तनाव अब वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है और इससे आने वाले समय में तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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