.
स्थान – रविदास गेट के सामने लंका वाराणसी
जायकों के शहर काशी में अपने स्वाद से लोगों को दीवाना बनाने वाली दो दुकानों पर लोक निर्माण विभाग का बुलडोजर चला। जिसके बाद इस कार्रवाई का वीडियो वायरल हुआ। लोगों ने कहा कि अब चाची की कचौड़ी और पहलवान की लस्सी का स्वाद नहीं मिलेगा। लेकिन, यहां उदासी ज्यादा देर तक नहीं रही। महज 48 घंटे बाद दोनों दुकानदारों ने अपनी अस्थाई दुकान खोज ली है। जहां अब इन दोनों दुकानों पर स्वाद चखने वालों की भीड़ लग रही।
17 जून की रात 30 दुकानें तोड़ी गई थीं 17 जून की रात 10 बजे जब करीब 30 दुकानें टूटना शुरू हुईं तो मशहूर‘पहलवान लस्सी जिनकी 75 साल पुरानी दुकान के मालिक मनोज यादव भावुक हो उठे। वह दुकान के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
थोड़ी देर तक मन ही मन प्रार्थना की, फिर जमीन को प्रणाम किया और दूर खड़े होकर टकटकी लगाए अपनी दुकान को टूटते देखते रहे। इसके अलावा, 103 साल पुरानी ‘चाची की कचौड़ी’ समेत कुल 30 दुकानें भी तोड़ी गईं हैं।

पहलवान लस्सी दुकान के मालिक मनोज यादव भावुक हो गए। हाथ जोड़कर दुकान को प्रणाम किया।
वाराणसी के लहरतारा से भिखारीपुर तिराहा, लंका चौराहा होते हुए भेलूपुर विजया माल तक 9.512 किमी लंबी फोरलेन सड़क बनाई जा रही है, जिसकी लागत 241.80 करोड़ रुपए है। इस परियोजना की जद में लंका चौराहे के पास स्थित ये 30 दुकानें आ रही थीं।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नपाई करने के बाद मकानों और दुकानों पर लाल निशान लगाकर करीब दो महीने पहले ही नोटिस दे दिया था। ये सभी दुकानें संकट मोचन मंदिर के महंत के परिवार की थीं, जिन्हें किराए पर दुकानदारों को दिया गया था।

जिन दुकानों को तोड़ा गया, वो संकट मोचन मंदिर के महंत परिवार की थीं।
पहलवान लस्सी और चाची की कचौड़ी की नई दुकान का पता जानिए
पहलवान लस्सी के मालिक बोले- हम ग्राहकों को उदास नहीं करेंगे

पहलवान लस्सी की नई दुकान पर ग्राहकों की लगी भीड़।
प्रसिद्ध पहलवान लस्सी की दुकान अब 20 कदम दूर खुल गई है। दुकान के मालिक मनोज यादव ने बताया कि हम अपने ग्राहकों को उदास नहीं कर सकते हैं इसलिए हमने कुछ दिनों के लिए यह स्थान लिया है।
उन्होंने कहा कि हमें अपना घर भी चलना है इसलिए दुकानदारी करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारा स्थान जिस जगह पर था उससे हमारा लगाव था।
वह स्थान ही हमारी पहचान थी बहुत से फिल्म की शूटिंग उसी दुकान पर हुई है लेकिन आज उस तरफ देखने के बाद मन उदास हो जाता है।
‘चाची कचौड़ी’ की जहां टूटी दुकान, उसी के सामने नया ठिकाना बनाया

‘चाची कचौड़ी’ की नई दुकान के बाहर लोगों की लगी भीड़।
‘चाची कचौड़ी’ की दुकान के टूट जाने से उसके चाहने वाले काफी मायूस हो गए थे, लेकिन अब एक बार फिर ठीक पुरानी दुकान यानी मलबे के सामने ‘चाची कचौड़ी’ की दुकान पुराने अंदाज में चलने लगी है।
चाची कचौड़ी’ के बेटे कैलाश यादव जो इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, ने बताया कि अभी कुछ दिन नए स्थान पर एडजस्टमेंट करने में लगेगा, लेकिन कोशिश इस बात की है कि नई शुरुआत हो।
उन्होंने कहा अभी तक ना तो मुआवजे की राशि और ना ही पुनर्वास के बारे में किसी ने आश्वासन दिया है। उन्होंने दुखी मन से यह भी बताया कि तमाम हस्तियां, बड़े-बड़े नेता उनके यहां कचौड़ी तो खाने आते थे, लेकिन किसी ने एक फोन तक करके हाल-चाल नहीं लिया।
अब फेमस दोनों दुकानों के बारे में जानिए

इस तस्वीर में लस्सी मथते मनोज के साथ बॉलीवुड स्टार मिथुन चक्रवर्ती दिख रहे हैं। वो लस्सी पीने के लिए यहां पहुंचे थे। (फाइल फोटो)
1.) पहलवान लस्सी…73 साल पुरानी दुकान; योगी-शाह भी थे दीवाने काशी में एक कहावत थी, ‘चाय पीए के होए त अस्सी, अ नाहीं त पहलवान के लस्सी‘। हालांकि, अब पहलवान लस्सी की दुकान टूट चुकी है। अभी दूसरी जगह इन्होंने अपना ठिकाना नहीं बनाया। पहलवान लस्सी कुल्हड़ में दही, मलाई-रबड़ी के खास कॉम्बिनेशन से तैयार होती थी। इस स्वाद को चखने के लिए सिर्फ काशी के लोग ही नहीं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान से लेकर दुनियाभर के लोग पहुंचते थे।
ये खास जायका योगी आदित्यनाथ, अमित शाह, स्मृति ईरानी से लेकर अखिलेश यादव तक को पसंद रहा। पहलवान लस्सी की दुकान लंका चौराहे से थोड़ा-सा अस्सी की तरफ बढ़ने पर थी। दुकान 75 साल पुरानी थी। यहां 8 वैरायटी की लस्सी यहां मिलती थी, जिनके रेट 30 रुपए से शुरू होकर 180 रुपए थे।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी एक जनसभा के लिए जब वाराणसी पहुंची, तो पहलवान की लस्सी पीने के लिए आईं थीं।

गमछा मुंह पर डाले ये कोई और नहीं, बॉलीवुड कलाकार संजय मिश्रा हैं। वो खुद ही दूध बनाने लगे थे।
2.) हींग-दाल वाली 108 साल पुरानी ‘चाची की कचौड़ी’ की दुकान भी टूटी

‘चाची की कचौड़ी’ वाराणसी की 108 साल पुरानी डिश थी। चाची इस दुनिया में नहीं हैं। अब दुकान भी टूट गई है। चाची की कचौड़ी’ का स्वाद लेने के लिए सड़क पर लंबी लाइन लगती थी। ब्यूरोक्रेट्स, पॉलिटिकल हस्तियां, फिल्मी दुनिया के सितारे, यूट्यूबर्स, मास्टरशेफ भी यहां आते थे।
यहां की खासियत थी कि हींग-दाल की डबल लेयर कचौड़ी के साथ सीताफल वाली सब्जी और मटका जलेबी भी दोने-पत्तल में परोसी जाती थी। 10 मिनट में बड़े चाव से लोग 5-10 कचौड़ियां खा जाते थे।
यह दुनिया की एकमात्र ऐसी दुकान थी, जहां पर कचौड़ी के साथ गाली भी परोसी जाती थी। वाराणसी में ऐसा ट्रेंड चला कि अगर चाची कचौड़ी खिलाते समय गाली दे-दें, तो तकदीर के ताले ही खुल जाएं।
Source Agency News
Village Post