यूपी में कथावाचक की जाति पर क्यों भिड़े यादव-ब्राह्मण?: चोटी काटने को यादवों के मुंह पर तमाचा कहा; यजमान बोले- पत्नी का हाथ पकड़ा – Etawah News

 

इटावा में 21 जून से भागवत कथा शुरू हुई। शाम को पता चला कि कथावाचक ब्राह्मण नहीं, यादव हैं। इसके बाद हंगामा हो गया। कथावाचकों को मारा-पीटा गया। उनकी चोटी काट दी गई। सिर मुंडवा दिया गया। एक महिला के पैरों में नाक रगड़वाई गई। इन सबका वीडियो बनाया। अगले

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कथावाचकों मुकुट मणि और संत सिंह यादव को लखनऊ बुलाया। उनकी मदद की। इसके बाद इटावा पुलिस एक्टिव हुई। 4 कथावाचकों के साथ बदसलूकी करने वाले 5 लड़कों को गिरफ्तार किया। इसके बाद यादव-ब्राह्मण वर्ग आमने-सामने हो गया। कथावाचकों के खिलाफ भी FIR हुई।

दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले की हकीकत जानने के लिए इटावा पहुंची। कथा स्थल देखा। ब्राह्मण परिवार से मिले। जिन्हें गिरफ्तार किया गया था, उनके घरवालों से भी बात की। इसके बाद कथावाचक मुकुट मणि के घर पहुंचे। वहां के लोगों से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

ये तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिसमें कथावाचकों का सिर मुंडवा दिया गया। महिला के पैर पर सिर रखकर माफी मंगवाई गई।

ये तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिसमें कथावाचकों का सिर मुंडवा दिया गया। महिला के पैर पर सिर रखकर माफी मंगवाई गई।

गांव में घटना के चलते तनाव है। गांव तक आने वाली सड़कों पर पुलिस फोर्स तैनात है। सबसे पहले हम कथास्थल पर पहुंचे। यहां टेंट उखड़ चुके हैं। मुख्य कलश अभी भी उसी जगह पर रखा है। कलश यात्रा में इस्तेमाल कलश वहीं जमीन पर पड़े हैं। मंदिर का गेट खुला है, लेकिन कोई भी मौजूद नहीं है। मंदिर के पुजारी रामस्वरूप दास उर्फ पप्पू बाबा फिलहाल फरार हैं। पुलिस पूछताछ के लिए उन्हें तलाश रही है।

2023 में भी यहां भागवत कथा हुई थी

दादरपुर गांव का यही वह कथास्थल है, जहां एक दिन भागवत चली, फिर विवाद हो गया।

दादरपुर गांव का यही वह कथास्थल है, जहां एक दिन भागवत चली, फिर विवाद हो गया।

इटावा जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर दादरपुर गांव है। यह गांव ब्राह्मण बाहुल्य है। यहां ब्राह्मणों के 103 घर हैं। इसके अलावा ठाकुर, दलित वर्ग के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं। गांव के ही एक छोर पर मंदिर बना है। गांव के धार्मिक कार्यक्रम यहीं होते हैं।

इस मंदिर का रखरखाव बाबा रामस्वरूप दास करते हैं। पिछले महीने चर्चा हुई कि भागवत कराई जाए। गांव के लोगों ने सहमति दी और चंदा देना शुरू कर दिया। इसके पहले 2023 में भी भागवत कथा हुई थी।

पूजास्थल पर कलश और बाकी पूजा सामग्री वैसे ही रखी है।

पूजास्थल पर कलश और बाकी पूजा सामग्री वैसे ही रखी है।

पत्नी का हाथ पकड़ा तो वह हड़बड़ाई दादरपुर गांव में 21 जून से कथा शुरू हुई। उसी दिन गांव की महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। कथा के लिए गांव के ही जयप्रकाश तिवारी और उनकी पत्नी रेनू को परीक्षित (मुख्य यजमान) बनाया गया। जयप्रकाश गुजरात के जामनगर जिले के देवरिया गांव में एक दुकान चलाते हैं। उनकी 3 बेटियां हैं, 1 बेटा है। पूरा परिवार हरिद्वार में रहता है। गांव में जब धर्म-कर्म का कोई कार्यक्रम होता है, तो परिवार गांव आता है।

हम गांव स्थित जयप्रकाश के घर पहुंचे। उनसे बातचीत शुरू हुई। हमने पूछा कि क्या आपको कथावाचक मुकुट मणि के बारे में पता नहीं था? जयप्रकाश कहते हैं- इन्हें रामस्वरूप दास बाबा लेकर आए थे। सबको पता था कि ये यादव हैं। व्यास और संत की कोई जाति नहीं होती। जो पढ़ेगा वह बनेगा, लेकिन यहां मामला दूसरा है।

ये मुख्य यजमान जयप्रकाश तिवारी की पुश्तैनी घर है। परिवार हरिद्वार में रहता है, वह खुद गुजरात में दुकान चलाते हैं।

ये मुख्य यजमान जयप्रकाश तिवारी की पुश्तैनी घर है। परिवार हरिद्वार में रहता है, वह खुद गुजरात में दुकान चलाते हैं।

जयप्रकाश कहते हैं- 21 जून की रात कथा खत्म होने के बाद ये लोग हमारे घर आए। इनके लिए भोजन की व्यवस्था थी। ये घर के अंदर खाना खाने गए। मेरी पत्नी रेनू से कहा कि हाथ पकड़कर खाना खिलाओ। 7 दिन मेरी खूब सेवा करो, पुण्य मिलेगा। इससे मेरी पत्नी हड़बड़ा गई और वह मेरे पास आई। हम अंदर गए तो वो लोग भी हड़बड़ा गए। तुरंत ही बाहर निकल आए। उनकी झोली से 2 आधार कार्ड गिर गए। एक में अग्निहोत्री और दूसरे में यादव लिखा था। उनके साथ यहां कुछ नहीं हुआ। वो कथा स्थल पर गए। वहीं गांव के कुछ लड़कों ने उनके बाल काटे, वह वीडियो वायरल है।

हमें कथावाचकों ने खुद को अग्निहोत्री बताया जयप्रकाश की पत्नी रेनू कहती हैं- हमें इन्होंने अग्निहोत्री बताया था। इसके बाद हमने इनसे कभी जाति नहीं पूछी। बाकी इनका स्वभाव शुरुआत से ही गलत था। पूजा करवाते वक्त गलत तरह से टच करते थे। खाली कलश उठवा दिया।

हमने पूछा कि मूत्र छिड़कने की बात चल रही? रेनू कहती हैं- यह गंदी बात उछाली जा रही है। कुछ लड़कों ने इनसे माफी मंगवाई थी। इन लोगों ने मेरे पैर छुए और नाक रगड़ी थी। इसके बाद इनके साथ क्या कुछ हुआ, हमें नहीं पता। क्योंकि, हम लोग तो घर में चले आए थे। ये लोग भी गांव में चले गए थे।

लड़कों ने जो किया वह सही किया जयप्रकाश तिवारी की भाभी रमा कहती हैं- हम लोगों ने जैसे पंडितों का सम्मान किया जाता है, वैसे ही इनका सम्मान किया। लेकिन, इनकी नजर पहले से ही खराब थी। हम लोगों ने पहले ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब ये लोग घर आए तो बवाल कर दिया। कहने लगे कि पैर धुलो। इसके बाद हर महिला से कहा कि पैर छुओ, लेडीज को गलत तरीके से टच किया। यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ।

रमा कहती हैं- जहां इन कथावाचकों के साथ बदतमीजी हुई, वहां दूसरे गांव के लोग भी थे। लेकिन सवाल यह कि उन्होंने भी तो गलत किया था, फिर हम लोग क्या करते?। जो किया, वह उचित नहीं तो क्या है?

ऐसे पता चला कि कथावाचक यादव हैं जय प्रकाश के घर पर बातचीत के बाद हम गांव में ही कुछ लोगों से मिलने निकले। पता चला कि किसी को भी यह नहीं पता था कि मुकुट मणि और संत सिंह यादव बिरादरी से हैं। कथा का जो कार्ड छपा उसमें आचार्य पं. मुकट मणि महाराज जी, श्री धाम वृंदावन (मथुरा) लिखा गया। पता चला कि मुकुट मणि के साथ जो ढोलक वाला लड़का सूरदास था, उसकी रिश्तेदारी गांव में ही थी। वह वहीं गया था। उससे कथावाचक के बारे में पूछा गया तो उसने बता दिया कि यादव हैं।

गांव में ही एक जानकारी यह भी मिली कि मंदिर की देख-रेख करने वाले रामस्वरूप दास उर्फ पप्पू बाबा को मुकुट मणि के बारे में पहले से पता था। पहले भी तीन बार वह मुकुट मणि की कथा अलग-अलग जगहों पर करवा चुके हैं। यहां भी 25 हजार रुपए में कथा तय हुई थी। इनके रहने की व्यवस्था गांव में ही सरकारी राशन की दुकान चलाने वाले के घर पर थी।

कथा के पहले दिन जयप्रकाश ने अपने घर भोजन की व्यवस्था की थी। जैसे ही ये लोग वहां पहुंचे, जाति को लेकर विवाद शुरू हो गया। काफी देर तक इस बात पर पंचायत चलती रही कि यादव क्यों छिपाया गया? इस वीडियो में मुकुट मणि यह कहते हुए दिख रहे कि हमारी कोई जाति नहीं है।

यह भागवत कथा आयोजन का कार्ड है। इसमें कथावाचक के नाम के आगे आचार्य पंडित लिखा है।

यह भागवत कथा आयोजन का कार्ड है। इसमें कथावाचक के नाम के आगे आचार्य पंडित लिखा है।

बहन बोली- मेरा भाई वहां नहीं था, फिर भी गिरफ्तार हमें गांव के ही पंचायत भवन पर सौम्या अवस्थी मिलीं। पुलिस ने उनके भाई को भी गिरफ्तार किया है। सौम्या कहती हैं- मेरा भाई किसी भी वायरल वीडियो में नहीं है। वह उस वक्त वहां गया भी नहीं था। लेकिन, उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह तो अभी 12वीं में पढ़ाई करता है। 17 साल का है, लेकिन पुलिस ने 19 साल का दिखा दिया है। गांव में पुलिस आई तो सबका नाम पूछने लगी। जो भी अपर कास्ट का मिला, उसे गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गई।

मुकुट मणि के गांव में गुस्से में लोग हम दादरपुर गांव से निकलकर करीब 40 किलोमीटर दूर मुकुट मणि के गांव जवाहरपुरवा पहुंचे। यह प्रतापनेर ग्राम पंचायत का एक पुरवा है। गांव में करीब 70 घर हैं, सभी यादव बिरादरी के हैं। मुकुट मणि का घर गांव के एक छोर पर है। कीचड़ के बीच से हम उनके घर पहुंचे। मुकुट मणि की मां बोल नहीं सकती, वह जन्म से ही गूंगी हैं। मुकुट के भाई रंजीत से बातचीत शुरू हुई। पता चला कि मुकुट कुल 8 भाई थे। 1 भाई की मौत अभी कुछ साल पहले हो गई थी। अब 7 बचे हैं।

जवाहरपुरवा में ये मुकुट मणि का घर है। उनके भाई का कहना है कि कभी-कभार ही वह घर आते हैं।

जवाहरपुरवा में ये मुकुट मणि का घर है। उनके भाई का कहना है कि कभी-कभार ही वह घर आते हैं।

रंजीत से हमने पूछा कि मुकुट कब से कथा की तरफ चले गए? रंजीत कहते हैं- मुकुट मणि घर में सबसे बड़े हैं। उन्होंने एमए किया फिर शास्त्री कर लिया। उसके बाद वह कथा कहने लगे। पिछले 10-12 साल से वह अछल्दा में ही रहते थे, घर पर कभी-कभी ही आते थे। उन्होंने शादी नहीं की। उनके साथ जो घटना घटी, उसकी जानकारी हमें फोन पर समाचार देखने के दौरान मिली। बाकी वह कई बार भागवत कर चुके हैं, कभी कोई विवाद नहीं हुआ।

मुकुट मणि के पोस्टर भी उसके नाम के आगे आचार्य पंडित लिखा है।

मुकुट मणि के पोस्टर भी उसके नाम के आगे आचार्य पंडित लिखा है।

यह घटना यादवों के गाल पर तमाचा है हमें यहीं मुकुट मणि के चाचा हुकुम सिंह यादव मिले। हमने उनसे कहा कि मुकुट पर छेड़खानी का आरोप है? हुकुम सिंह कहते हैं- उन लोगों ने पिटाई की, चोटी काटी, नाक रगड़वाई। इस सबका वीडियो बनाया फिर छेड़खानी का वीडियो क्यों नहीं बनाया? उसका भी वीडियो बनाना था। इन्हें नहीं पता था कि ये जो वीडियो बना रहे हैं, वह पूरे क्षेत्र में चल जाएगा। इन्होंने तो इसलिए वायरल किया कि देखो हमने मारपीट की है।

हमने पूछा कि अब आप क्या करेंगे? हुकुम सिंह कहते हैं- यह यादवों के गाल पर करारा तमाचा है, पूरे हिंदुस्तान में हम इसका विरोध करेंगे। भागवत किसी जाति के लिए नहीं है, सब पढ़ सकते हैं। अगर सिर्फ ब्राह्मण के लिए है, तो फिर नियम बनाएं कि कोई और नहीं कर सकता।

गांव के ही राम प्रताप सिंह कहते हैं- मुकुट हमारे गांव का है। हम उसके बारे में अच्छे से जानते हैं। कम से कम 10-12 साल से वह भागवत कर रहा है। अब अगर इसने ब्राह्मण बनकर भागवत की, तो गलत है। यादव समाज के लोग भी भागवत कर रहे हैं, बाकी ग्रंथ सब पढ़ सकते हैं।

सोशल मीडिया पर बदले की बात इटावा में ब्राह्मण और यादवों के बीच मनमुटाव की स्थिति है। इन सबके बीच सोशल मीडिया पर बदला पूरा होने जैसी बातें लिखी जा रहीं। हमने इस बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि 2013 में संतोषपुरा गांव में एक ब्राह्मण लड़का यादव परिवार की लड़की को लेकर भाग गया था। इसके बाद यादव वर्ग के लोगों ने ब्राह्मण लड़के के परिजनों को जूते की माला पहनाकर गांव में घुमाया था। अब दादरपुर की घटना सामने आने के बाद ब्राह्मण वर्ग के लोग लिख रहे कि ‘बदला पूरा हुआ।’

फिलहाल इस मामले में अब कथावाचक मुकुट मणि और सहयोगी संत सिंह यादव के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। उन पर फर्जी आधार कार्ड और जाति छिपाकर धोखाधड़ी करने का मुकदमा दर्ज हुआ है। 26 जून को इनके समर्थन में उतरे यादव संगठन के करीब 2000 लोगों ने बकेवर थाना घेर लिया। पथराव किया। पुलिस की भी एक गाड़ी तोड़ दी।

अहीर रेजिमेंट और यादव संगठन के करीब 2 हजार लोगों ने 26 जून को प्रदर्शन किया। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर लोगों को तितर-बितर किया।

अहीर रेजिमेंट और यादव संगठन के करीब 2 हजार लोगों ने 26 जून को प्रदर्शन किया। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर लोगों को तितर-बितर किया।

घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आए हमने गांव के तमाम लोगों से मिलकर वायरल वीडियो इकट्ठा किए। एक वीडियो में एक लड़का संत सिंह के बाल काटते दिखता है। दूसरे वीडियो में संत सिंह को रेनू तिवारी के पैरों पर नाक रगड़कर माफी मांगने को कहा जा रहा। वह ऐसा कर भी रहे हैं। एक अन्य वीडियो है, जिसमें मुकुट मणि से पूछा जा रहा कि तुम यादव हो कि नहीं? इस सवाल के जवाब में मुकुट मणि कहते हैं कि हमारी कोई जाति नहीं। इस पंचायत में करीब 20 लोग उन्हें घेरे हुए खड़े हैं।

21 जून की रात को मुकुट मणि और संत सिंह यादव को गांव से भगा दिया गया था। अगले दिन के लिए आजमगढ़ से सुखदेव मिश्रा को भागवत कहने के लिए बुलाया गया। उन्होंने पूरे दिन भागवत की, लेकिन शाम होते-होते पिछली रात वाले वीडियो वायरल हो गए। कथावाचकों ने केस दर्ज करवाया और फिर पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी। भागवत बंद कर दी गई। रामस्वरूप दास भी फरार हो गए।

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