ईरान की सत्ता में नए समीकरण, क्या बदले की नीति अपनाएंगे Mojtaba Khamenei?

Mojtaba Khamenei को हाल ही में ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुने जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि ईरान की शक्तिशाली संस्था Assembly of Experts के 88 सदस्यों ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या वह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर बदले की राजनीति करेंगे।

ईरान में सुप्रीम लीडर की ताकत

Iran में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। सरकार, सेना, विदेश नीति और न्याय व्यवस्था से जुड़े बड़े फैसलों पर अंतिम मुहर इसी पद की होती है।

1979 की Iranian Revolution के बाद पहले Ruhollah Khomeini और फिर Ali Khamenei इस पद पर रहे। अब मुज्तबा खामेनेई को उसी सत्ता की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

आईआरजीसी से जुड़ा रहा है मजबूत नेटवर्क

मुज्तबा खामेनेई कम उम्र में ही ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़ गए थे। बताया जाता है कि उन्होंने 1980 के दशक में हुए Iran–Iraq War के दौरान कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया था।

इस दौरान बने उनके संपर्क आज भी ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और अर्धसैनिक संगठनों में प्रभावशाली माने जाते हैं, जिससे उनकी ताकत और बढ़ी मानी जाती है।

धार्मिक योग्यता पर उठ रहे सवाल

ईरान के संविधान के मुताबिक सुप्रीम लीडर के लिए आमतौर पर “अयातुल्ला” स्तर का धार्मिक विद्वान होना जरूरी माना जाता है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि मुज्तबा अभी सिर्फ “हुज्जत-उल-इस्लाम” स्तर के धार्मिक विद्वान हैं।

इस वजह से देश के अंदर कुछ वर्गों में उनके चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं और कई लोग उन्हें सुप्रीम लीडर के तौर पर स्वीकार करने को लेकर असमंजस में हैं।

संपत्ति और प्रभाव को लेकर चर्चा

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुज्तबा खामेनेई के पास विदेशों में बड़ी संपत्ति और कारोबारी नेटवर्क हो सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिर भी विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता, सैन्य नेटवर्क और आर्थिक प्रभाव—इन तीनों का संयोजन उन्हें ईरान की राजनीति में बेहद शक्तिशाली बना सकता है।

अमेरिका-इजरायल से टकराव बढ़ेगा?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या मुज्तबा खामेनेई के नेतृत्व में Israel और United States के साथ टकराव और तेज होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा चलता है, तो यह न केवल ईरान की राजनीति बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मुज्तबा खामेनेई अपनी सत्ता को स्थिर कर पाएंगे, या ईरान के भीतर ही उनके नेतृत्व को चुनौती मिलती रहेगी।

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