खाना खाने के बाद अपार्टमेंट के ज्यादातर लोग सोने की तैयारी में थे। कुछ बाहर घूमने निकले थे तो कई वापस लौटे थे। भूकंप का पहला झटका लगा तो लोग सहम गए। होश सम्हालते ही बाहर की तरफ दौड़ शुरू हो गई। चंद पलों में ही अपार्टमेंट खाली हो गया। बाहर निकलकर लोग एक दूसरे का हाल जानने में जुट गए। कुछ देर में झटके तो बंद हो गए लेकिन लोग अपार्टमेंट में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। डर ऐसा की कई लोग घंटों बाहर बैठे रहे।
बोले लोग..
पहली बार जब झटका आया तब मुझे लगा कि कुछ हिल रहा है, लेकिन दूसरी बार तो झटका जैसा हाे गया। इसके बाद पत्नी-बच्चों के साथ बाहर भागा और पूरे अपार्टमेंट में शोर मचाकर लोगों को बताने लगा। -पदम अग्रवाल
मैं तो पूरी तरह से कांप उठा, झटपट घरवालों को जगाया और बाहर आया। अपार्टमेंट में अफरातफरी मची थी। सभी बाहर की ओर भाग रहे थे। थोड़ी देर बाद खुली जगह पर जाने के बाद राहत की सांस ली। -अनंत अग्रवाल
मैं तो सो गया था, लेकिन झटका इतना तेज था कि मेरी आंख खुल गई। देखा कि घरवाले सभी लोग भूकंप-भूकंप चिल्ला रहे हैं। फौरन मैं भी कमरे से बाहर निकला। अभी तक मन घबरा रहा है। -विवेक अग्रवाल
भोजन करके हम लोग सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक झटका महसूस हुआ। सबसे पहले खुद को सुरक्षित करने के मकसद से हम लोग बाहर आए। हमसे पहले ही बहुत से लोग बाहर आ चुके थे। -राजेश छेनिया
जब मैंने अपार्टमेंट में भूकंप-भूकंप की आवाज सुनी तो मन घबरा गया। झटका भी महसूस हुआ और तत्काल घरवालों के साथ बाहर की ओर भागी। बहुत ही अजीब सा लग रहा था। -प्रिया
झटका महसूस होने के बाद पहले खुद बाहर आई, फिर दूसरों को फोन करके भूकंप की जानकारी देते हुए बाहर बुलाई। एक घंटा हो गया, लेकिन भूकंप का डर नहीं जा रहा है। -अंजली
भूकंप का झटका महसूस होते ही बाहर आया और अपने अन्य परिचितों को भी फोन करके जानकारी दी। मेरे मोबाइल फोन पर भी अलर्ट आ गया था। उसमें बताया गया कि 24 मिनट अलर्ट रहें, फिर दोबारा आ सकता है। -विकास पांडेय
होटल रेडिशन लाइव
भूकंप आते ही होटल रेडिशन के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। कई लोग तौलिया लपेटे ही बाहर आ गए तो परिवार के साथ ठहरे कुछ लोग देर रात तक होटल में जाने में डर रहे थे। एक-डेढ़ घंटे के बाद जब वे रिलैक्स हुए तब जाकर अपने कमरे में गए। हालांकि, सबके बीच एक ही चर्चा थी कि भूकंप का केंद्र नेपाल था, पता नहीं वहां कितना नुकसान हुआ होगा।
मैं भुनेश्वर से आया हूं। होटल के 515 नंबर रूम में ठहरा हूं। जब भूकंप आया, उस समय में दाढ़ी बना रहा था। तौलिए में ही नीचे आ गया। मैंने अपने जीवन में इस तरह के भूकंप का झटका महसूस नहीं किया था। बहुत डर लग रहा है, अब कमरे में कैसे सोएं। -अशोक छलोलिया
झारखंड रांची से आया हूं। मैं अपने रिश्तेदार गीता प्रेस के ट्रस्टी दिवंगत बैजनाथ अग्रवाल के यहां से लौटकर होटल में आया और सोने की तैयारी कर रहा था। तभी पत्नी ने कहा, भूकंप आ गया। इसके बाद मैं तत्काल बाहर की तरफ भागा। भूकंप के झटके से मैं और पत्नी बहुत डरे हुए हैं। -महेश बंसल
Village Post