“ब्रिटेन अब रहने लायक नहीं रहा” – 337 मिलियन डॉलर में अपना घर बेचकर दुबई शिफ्ट हो रहे हैं यूके के शिपिंग टाइकून

 

ब्रिटेन पिछले काफी समय से अपने सबसे अमीर नागरिकों के देश से पलायन का सामना कर रहा है. इस कड़ी में अब नॉर्वे में जन्मे शिपिंग टाइकून जॉन फ्रेड्रिक्सन ने भी यूके को अलविदा कह दिया है. फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रेडरिकसन यूके के नौवें सबसे अमीर अरबपति हैं. उन्होंने हाल ही में लंदन स्थित अपनी 300 साल पुराने जॉर्जियन बंगले को 337 मिलियन डॉलर यानी 2800 करोड़ रुपये में बेचने का फैसला किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह आलीशान प्रॉपर्टी 30,000 वर्ग फीट में फैला हुआ है. इस बंगले में 10 बेडरूम, एक निजी बॉलरूम और दो एकड़ में फैला बगीचा भी है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रेड्रिक्सन ने अपने आलीशान बंगले को बेचने का फैसला ब्रिटेन की आर्थिक नीतियों के खुलेआम आलोचना करने के बाद लिया है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘ब्रिटेन टैक्स में हुए प्रतिकूल बदलावों के चलते नर्क बन चुका है.’

13.7 बिलियन पाउंड की संपत्ति के मालिक हैं जॉन फ्रेड्रिक्सन

फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉन फ्रेड्रिक्सन यूके के 9वें सबसे अमीर नागरिक हैं, जिनकी कुल संपत्ति करीब 13.7 बिलियन पाउंड है. फ्रेड्रिक्सन के पास दुनिया की सबसे बड़ी तेल टैंकर फ्लीट्स में से एक है. इसके अलावा, उनके कारोबार में ऑफशोर ड्रिलिंग, फिश फार्मिग और गैस सेक्टर बिजनेस भी शामिल है.

नॉर्वेजियन पब्लिकेशन E24 को दिए एक इंटरव्यू में फ्रेड्रिक्सन ने एक घोषणा की कि अब वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहेंगे और वहीं से पश्चिमी दुनिया में फैले अपने बिजनेस का संचालन करेंगे. उन्होंने कहा, “पूरी पश्चिमी दुनिया अपने पतन की ओर जा रही है.” इस दौरान उन्होंने कहा, “यूके के टैक्स में हुए बदलावों के कारण उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में बसने का फैसला किया है, जहां वे अपना अधिकतर समय बिताते हैं और अपने वैश्विक बिजनेस ऑपरेशन्स का वहीं से संचालन करेंगे.

ब्रिटेन से अरबपतियों का पलायन के पीछे के प्रमुख कारण

दरअसल, ब्रिटेन में काफी समय से बड़े पैमाने पर अरबपतियों के पलायन जारी है. इसके पीछे कई अहम कारण हैं. जिसमें सबसे प्रमुख कारण टैक्स नीतियों में बदलाव है. इसके अलावा,

    • लेबर सरकार की ओर से यूके में 1799 से लागू नॉन-डोमिसाइल (नॉन-डॉम) टैक्स प्रणाली को खत्म करना
    • अप्रैल 2025 में, चांसलर रेचेल रीव्स की ओर से इस प्रणाली को खत्म कर इनहेरिटेंस टैक्स लागू लगाया जाना
    • कैपिटल गेन्स टैक्स की दरों में बढ़ोत्तरी (बेसिक रेट को 10% से बढ़ाकर 18% और हायर रेट 20% से बढ़ाकर 24% कर दिया गया है.)
    • नेशनल इंश्योरेंस कॉन्ट्रिब्यूशन्स (NICs) में बढ़ोत्तरी

वहीं, टैक्स नीतियों के बदलाव के अलावा, यूके का ब्रेक्सिट भी एक बड़ा कारण रहा है. इससे

    • ब्रेक्सिट के कारण आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है
    • पाउंड कमजोर हुआ है
    • यूरोपीय संघ में यूके के नागरिकों के लिए वीजा आवश्यक हो गया है
    • लंदन स्टॉक एक्सचेंज की घटती वैश्विक प्रतिष्ठा
    • 2008 की मंदी से अब तक यूके की धीमी आर्थिक रिकवरी भी ऐसे कारण है.

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