जॉन बोल्टन के अनुसार, पीटर नवारो ट्रंप और मोदी के बीच तनातनी फैलाने का काम कर रहे थे।

 

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्ष सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने गुरुवार  को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. बोल्टन ने कहा कि पीटर नवारो ने एक बार डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच लड़ाई कराने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि यह महज एक साइड शो है जिसे नजरअंदाज किया जा सकता है, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को लेकर असली बातचीत करने वाले बैठकर इस पर चर्चा कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘भारत सोशल मीडिया पर दी जा रही धमकियों और इस शोर शराबे से दूर रह सकता है और बस अपने काम पर ध्यान देकर देख सकता है कि भारत-अमेरिका के बीच कोई समझौता होना मुमकिन है.’

दोनों पक्षों को अच्छी नीयत रखनी होगी- बोल्टन

पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रहा कि ये मुद्दे आसान होंगे और जल्द ही सुलझ जाएंगे, लेकिन मुझे लगता है कि अगर इस मुद्दों पर काम करना है तो दोनों पक्षों को एक-दूसरे के लिए अच्छी नीयत रखनी होगी.’

बोल्टन ने नवारो को लेकर एनडीटीवी से कहा, ‘अगर आप पीटर को किसी एक कमरे में अकेला छोड़ दें और एक घंटे बाद लौटेंगे, तो आप पाएंगे कि वह खुद से ही बहस कर रहे हैं.’ राष्ट्रपति ट्रंप के इस व्यापार सलाहकार ने नई दिल्ली की रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर आक्रामक रुख अपनाया था और यहां तक कि इस ब्लड मनी तक कह दिया था.

बोल्टन ने कहा, ‘उन्होंने भारत को टैरिफ महाराजा तक कहकर संबोधित किया था और धमकी दी थी कि अगर भारत ने किसी स्तर पर अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत में समझौता नहीं किया, तो नई दिल्ली के लिए इसका अंत अच्छा नहीं होगा.’

ट्रंप और मोदी के बीच नवारो ने टकराव की क्या की थी कोशिश?

जब बोल्टन से नवारो की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच टकराव कराने की कोशिश के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा, ‘यह एक बैठक थी, जहां मैंने उम्मीद की थी दोनों नेता चीन से निपटने और दूसरे बड़े खतरों का सामना करने जैसे रणनीतिक मुद्दों पर बात करेंगे, जिनसे हमें इस शताब्दी में जूझना पड़ेगा. लेकिन पीटर सिर्फ इस पर बात करना चाहता था कि उसे भारतीय व्यापार करने की कोशिशें कितनी गलत लगती हैं.’ उन्होंने कहा, ‘देखिए, मैंने व्यापार से जुड़े लोगों को ऐसा करते देखा है. व्यापार के मुद्दों में हमेशा शिकायतें होती हैं. यह इस विषय की प्रकृति ही है.’

 

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