IPS अभिषेक वर्मा यूपी पुलिस के वह अफसर, जिन्होंने 9 साल की सर्विस में कई कुख्यात को सलाखों के पीछे पहुंचाया। बचपन से पिता को खाकी वर्दी में देखने वाले अभिषेक ने आईपीएस बनने की ठानी। इसी वजह से बीटेक करने के बाद भी प्राइवेट सेक्टर में जॉब नहीं की।
.
UPSC की तैयारी करते हुए वह फर्स्ट अटेम्प्ट में IPS बने। 2016 बैच के IPS अभिषेक इस समय आगरा सर्किल में एसपी रेलवे हैं। इससे पहले वह हापुड़ और औरैया के एसपी रह चुके हैं। उनके पिता भी यूपी पुलिस फोर्स से साल 2023 में IG ईओडब्ल्यू के पद से रिटायर हुए।
दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज खाकी वर्दी में आज IPS अभिषेक वर्मा की कहानी 6 चैप्टर में पढ़ेंगे।

चित्रकूट में जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर राजापुर गांव के रहने वाले रामलाल वर्मा यूपी पुलिस में आईजी रहे। पुलिस विभाग में आने के बाद वह कानपुर के तिलक नगर में परिवार के साथ रहने लगे। 25 दिसंबर 1990 को घर में बेटे ने जन्म लिया। माता पिता ने नाम रखा- अभिषेक।
अभिषेक वर्मा बताते हैं कि मेरे पिता पुलिस विभाग में थे और मां श्रद्धा वर्मा गृहिणी हैं। बचपन से ही मेरी पढ़ाई अलग-अलग जिलों में हुई। पिताजी जहां भी पोस्टेड रहे, वहीं पर रहकर पढ़ना होता था। साल 2007 में कानपुर के सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज (ICSE बोर्ड) से फर्स्ट डिवीजन में हाईस्कूल की परीक्षा पास की।
2009 में कानपुर के ही सर पदमपत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर से इंटर पास किया। इसके बाद 2014 में JSS नोएडा से बीटेक किया। बीटेक करते समय ही कैंपस प्लेसमेंट में कई कंपनियों से जॉब के ऑफर आए। लेकिन मेरा सपना पिता की तरह पुलिस में जाने का था।
इसलिए कभी भी जॉब करने के लिए नहीं सोचा। बीटेक करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। साल 2015 में पहली बार यूपीएससी का एग्जाम दिया। पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक करते हुए , जहां 2016 बैच का आईपीएस बना।
पिता को जब पता चला कि मैं यूपीएससी के पहले ही एग्जाम में इंटरव्यू तक पहुंच गया। तब उन्होंने मुझसे कहा था, बेटा मुझे भरोसा है कि मेहनत के साथ-साथ सफलता भी हासिल होगी। हुआ भी वही। जब घर में आईपीएस बनने की खबर लगी तो पिताजी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

अभिषेक वर्मा कहते हैं कि ट्रेनिंग के बाद साल 2018 में लखनऊ में पहली पोस्टिंग हुई। क्राइम की जो भी घटना होती, मैं मौके पर पहुंचकर बारीकी से समझता था। सीनियर ऑफिसर से उस केस के सॉल्व करने के अलग-अलग प्वाइंट्स पर काम करता था।
2019 में बरेली में ASP के पद पर पोस्टिंग मिली। उस समय शैलेश पांडे एसएसपी बरेली थे। बरेली का फतेहगंज पश्चिमी साइबर फ्रॉड व ड्रग्स के लिए पहले से बदनाम रहा। सूचना मिली कि फतेहगंज वेस्ट के गांव धंतिया में साइबर फ्रॉड का गैंग इकट्ठा है। मैं उस समय CO-3 के पद पर तैनात था।
पुलिस फोर्स लेकर गांव में छापा मारा तो 18 लाख कैश बरामद हुआ। कई लग्जरी गाड़ी मिलीं, 700 से ज्यादा एटीएम व डेबिट कार्ड, 280 से ज्यादा फर्जी सिम बरामद हुए। पुलिस ने साइबर फ्रॉड में शामिल 10 लोगों को मौके से अरेस्ट किया।
जांच में सामने आया कि नाइजीरियन के साथ मिलकर यह गैंग यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड समेत अलग-अलग राज्यों में एक्टिव था। इसके बाद पूरे फतेहगंज वेस्ट में साइबर फ्रॉड से जुड़े गैंग की तलाश में अभियान चलाया गया। इस गैंग के 20 से ज्यादा लोगों को अरेस्ट कर जेल भेजा।

अभिषेक वर्मा बताते हैं कि बरेली में एएसपी रहने के बाद मुझे गाजियाबाद में एसपी सिटी की जिम्मेदारी मिली। उस समय किसान आंदोलन चल रहा था। दिल्ली से सटे होने के चलते बॉर्डर पर लगातार कानून व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। कभी किसान पैदल पदयात्रा निकालते तो कभी ट्रैक्टर परेड। यहां लगातार लॉ एंड ऑर्डर संभाला। कई बार किसान संगठनों के प्रमुखों से बातचीत कर बेहतर तरह से समन्वय कर भीड़ को संभाला।
गाजियाबाद में अक्टूबर 2020 में हुए नरेशपाल हत्याकांड केस को सॉल्व किया। यह गाजियाबाद का चर्चित केस था। जहां हमलावरों ने सुबह के समय नरेशपाल की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। नरेशपाल भाजपा विधायक अजीतपाल त्यागी के रिश्तेदार थे। घटना के बाद मौके पर एडीजी मेरठ व आईजी मेरठ भी पहुंचे थे। इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुंची थी।
2021 की बात है, गाजियाबाद के कौशांबी में एक व्यापारी की न्यूड लाश मिली थी। फोरेंसिक टीम से भी जांच कराई गई। सबसे पहले पुलिस ने व्यापारी की पहचान के लिए टीमें लगाईं। जांच में सामने आया कि व्यापारी ठगी का शिकार हो रहा था।
व्यापारी को उसका वीडियो व फोटो दिखाकर एक महिला और उसका पति ब्लैकमेल कर रहे थे। दंंपती व्यापारी से लगातार पैसों की मांग कर रहे थे। डिमांड पूरी न होने पर व्यापारी की हत्या कर शव को नग्न हालत में दिल्ली बॉर्डर पर फेंक दिया गया। इस केस को सॉल्व कर आरोपियों को अरेस्ट किया।

अभिषेक वर्मा कहते हैं कि गाजियाबाद में पोस्टिंग के बाद मुझे 2021 में औरैया एसपी की जिम्मेदारी मिली। नवंबर 2020 में सात साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई। जॉइन करते ही इस केस के बारे में जानकारी की। पुलिस की तीन टीमें लगाईं। केस सॉल्व करने के लिए मैं खुद मॉनिटरिंग कर रहा था।
बच्ची के परिजनों ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। लेकिन बच्ची बरामद नहीं हुई, पुलिस तलाश ही रही थी कि गांव के पास जंगल में शव मिला। हत्यारों ने बच्ची का गला काट दिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई थी।
इस केस की जांच चल ही रही थी कि उसी बीच एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया, वह बेटे की दवा लेने ऑटो से जा रही थी। ऑटो चालक उन्हें ले गया, जहां बंधक बनाकर रेप किया। पुलिस की जांच में सामने आया कि पूर्व में इसी घटनास्थल पर ही बच्ची की रेप के बाद हत्या की गई थी। इसमें पुलिस ने पीड़ित परिवारों से बात की। सर्विलांस टीम का सहारा लेने के साथ डीएनए टेस्ट भी कराया गया।
इस केस को सॉल्व करने के लिए मुखबिर भी लगाए। पुलिस ने आरोपी आशीष को अरेस्ट किया। उसने कबूल किया कि बच्ची को अगवा कर चाकू से गला काटकर हत्या कर दी थी। इसी आरोपी ने एक साल बाद महिला से भी रेप किया था। बच्ची से रेप और हत्या के इस केस को 3 साल बाद सॉल्व किया।
यह घटना मेरी पोस्टिंग से पहले की थी। शहर में ही साढ़े 3 साल की बच्ची से रेप करने की घटना में भी आरोपी को अरेस्ट किया। पीड़ित परिवार को बुलाकर पुलिस ने पूरा घटनाक्रम जाना। उसके बाद सर्विलांस टीम और मुखबिर की मदद से केस का खुलासा किया। यह केस भी एक साल से पेंडिंग था।

IPS अभिषेक बताते हैं कि अक्टूबर 2022 की बात है। मैं उस समय डीसीपी ग्रेटर नोएडा के पद पर तैनात था। वहां पर इकोटेक क्षेत्र में 10 साल के बच्चे को किडनैप किया गया। मैं मौके पर पहुंचा। क्राइम सीन देखा। पीड़ित लोगों से बातचीत में लगा था कि फिरौती के लिए ही बच्चे का अपहरण किया गया। तत्काल 5 टीमें बनाईं। सर्विलांस टीम की मॉनिटरिंग की।
जांच में सामने आया कि अपहरण करने वाला बच्चे के पिता के यहां ड्राइवर रह चुका है। उसके मोबाइल की सीडीआर देखी तो पता चला कि वह बदायूं जिले का रहने वाला है। उसने बच्चे को सूरजपुर इलाके में बंधक बनाकर रखा है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। बच्चे को बरामद करना बड़ी चुनौती थी। इसलिए सादे कपड़ों में पुलिस टीमों को लगाया। 10 घंटे में ही बच्चे को बरामद कर लिया।
अपहरण का मुख्य आरोपी शिवम पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। दो अन्य बदमाशों के पैर में गोली लगी। अभिषेक सिंह कहते हैं कि इस केस में अगर पुलिस देर करती तो बच्चे के साथ अनहोनी हो सकती थी। बदमाशों ने 30 लाख रुपए फिरौती मांगी थी, जिसमें पुलिस ने 29 लाख रुपए भी बरामद किए थे।

अभिषेक वर्मा कहते हैं कि अगस्त 2022 को हापुड़ में हरियाणा से पेशी पर आए कुख्यात लखन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना कचहरी गेट पर पुलिस कस्टडी में हुई। हमलवारों ने पुलिस वैन से उतरते ही हेड कॉन्स्टेबल ओमप्रकाश को भी हमलावरों ने गोली मार दी थी। नामजद आरोपी सुनील ने नोएडा कोर्ट में सरेंडर किया था।
इस केस में पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद के सूरजकुंड के 17 लोगों को जेल भेजा था। हत्याकांड में शामिल मुख्य शूटर मनोज भाटी की तलाश में पुलिस की 4 टीमें लगाई गईं। मनोज भाटी पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। उसे हापुड़ पुलिस ने हरियाणा के रेवाड़ी से गिरफ्तार किया।
पुलिस भाटी को हत्या में इस्तेमाल पिस्टल बरामद करने सबली अंडरपास के पास लेकर गई। इसी दौरान उसने दरोगा की पिस्टल छीनकर फायरिंग कर दी। एसओजी प्रभारी ओमवीर सिंह को गोली लगी। भाटी भाग निकला। जिसके बाद पुलिस ने उसको घेर लिया, जहां एनकाउंटर में कुख्यात मारा गया।
हापुड़ कचहरी के गेट पर हुई कुख्यात की हत्या के केस में सभी आरोपियों को जेल भेजा। पुलिस ने इसमें गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई की। मरने वाला और आरोपी हरियाणा के रहने वाले थे। यह हत्या 12.50 लाख रुपए की सुपारी देकर कराई गई थी।

IPS अभिषेक वर्मा के साथ पत्नी अंशिता और बेबी।
लव मैरिज के लिए परिवार ने साथ दिया
अभिषेक वर्मा बताते हैं कि जब मैं छोटा था तब पिता को हमेशा वर्दी में ही देखता था। अधिकांश बार ऐसा भी हुआ कि पिता सुबह वर्दी पहनकर घर से निकले और आधी रात के बाद घर आते थे। पहले पता नहीं था कि पुलिस की ड्यूटी 24 घंटे की होती है।
बाद में जब न्यूज में पढ़ने लगा तो पता चला कि पुलिस ऑफिसर की हर समय जिम्मेदार होती है। मेरे आगे बढ़ाने में पिता और मां का बहुत योगदान रहा। हमेशा ही मुझे आगे बढ़ाया। 12 वीं में साथ पढ़ने वाली अंशिता से दोस्ती हुई। बाद में शादी के लिए जब यह बात मां और पिता को बताई तो वे भी खुश हुए। जिसके बाद अंशिता से शादी की। अंशिता डेंटिस्ट हैं।
अचीवमेंट्स
- डीजीपी के सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया।
- डीजीपी के गोल्ड मेडल से भी नवाजा गया।
- डीजीपी का प्लेटिनम मेडल भी मिल चुका है।

………….
ये खबर भी पढ़ें…
बागपत के एक गांव में डेढ़ महीने में 12 मौतें:लोग बोले–चीनी मिल का जहरीला पानी बांट रहा बीमारियां, 36 लोग सांस–हार्ट पेशेंट

उत्तर प्रदेश में जिला बागपत के बूढ़पुर गांव में विनोद की तरह कुल 12 मौतें अचानक हुई हैं, वो भी डेढ़ महीने के भीतर। इसमें कुछ मौतें हार्टअटैक तो कुछ बीमारी से हुई हैं। गांव के लोग शुगर मिल के नाले को जिम्मेदार मानते हैं। कहते हैं कि नाले में बहने वाला जहरीला पानी कूड़ा-करकट की वजह से आगे नहीं सरकता, इसलिए वो जमीन के अंदर पहुंचकर भूजल में मिल जाता है।
इस वजह से गांव का पानी खराब हो रहा है और लोगों को तमाम बीमारियां हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यहां 30 लोग सांस और 6 लोग हृदय की बीमारी से पीड़ित मिले। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर इस मामले को समझा। गांववालों से बात की। पढ़िए पूरी खबर…
Source Agency News
Village Post