लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय केबर्खास्त 2 शिक्षकों की हुई वापसी।
लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में करीब 15 महीने पहले बर्खास्त किए गए 9 शिक्षकों में से 2 की वापसी हो गई है। यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग फैकल्टी के इन 2 शिक्षकों को बेहद दिलचस्प तरीके से वापस नौकरी मिली।
.
कुलपति प्रो.अजय तनेजा की अगुवाई में हुई विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की बैठक में मार्च 2024 को हुई इनकी बर्खास्तगी के निर्णय को गलत मानते हुए रद कर दिया गया। जबकि तत्कालीन कुलपति प्रो.एनबी सिंह ने फर्जी डॉक्यूमेंट और जालसाजी से नौकरी पाने का आरोप लगाकर सालों से तैनात कुल 9 शिक्षकों को यूनिवर्सिटी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
एक्सपर्ट कमेटी के निर्णय के आधार पर हुआ फैसला
बर्खास्त शिक्षकों में से डॉ.ममता शुक्ला और डॉ.मानवेंद्र सिंह की वापसी का रिकमेन्डेशन AICTE की एक्सपर्ट कमेटी पैनल ने किया था। कमेटी ने जांच में कहा कि इनके ऊपर लगे आरोप बेबुनियाद थे, गहनता से जांच में सभी डॉक्यूमेंट ओरिजिनल और जेन्युइन मिलने पर इनके खिलाफ हुए निर्णय को रद करने की संस्तुति की गई है।
किसी के साथ अन्याय नहीं होगा
वहीं, इस मामले पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अजय तनेजा का कहना है कि कार्यसमिति की बैठक में पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुए गलत निर्णयों को सुधारा भी गया है। यदि किसी के साथ अन्याय हुआ था तो उसे न्याय मिलेगा।

प्रो.अजय तनेजा, कुलपति
बैठक पर इन विषयों पर भी हुआ फैसला
वहीं, बैठक के दौरान यूनिवर्सिटी के अकाउंटेंट शबीह हैदर के खिलाफ चल रही जांच में उन्हें भी दोष मुक्त किया गया। उन पर भी कई संगीन आरोप थे, पर जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। इसके अलावा बिना कारण बताए अवकाश पर गए शिक्षक डॉ.मुर्तजा के संबंध में कमेटी गठित करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगी।
इन 9 शिक्षकों पर हुआ था एक्शन
पूर्व कुलपति प्रो.माहरुख मिर्जा, इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. संजीव त्रिवेदी,राजनीति विज्ञान की डा. ताबिंदा,बायोटेक्नोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रो. ममता शुक्ला, असिस्टेंट प्रो. मानवेन्द्र सिंह,असिस्टेंट प्रो. डॉ. नदीम अहमद अंसारी, मैनेजमेंट विभाग की असिस्टेंट प्रो.निधि सोनकर, भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रो. प्रवीण कुमार राय और उर्दू विभाग के डॉ. जमाल शब्बीर रिजवी की सेवा समाप्त कर दी गई है।

एक साथ 9 शिक्षकों पर हुई कार्रवाई से कैंपस में हड़कंप मच गया था।
गंभीर आरोपों के चलते हुआ था एक्शन
15 महीने पूर्व तत्कालीन कुलपति प्रो.एनबी सिंह की अगुवाई में कार्यपरिषद की बैठक में सभी को पद से हटाने और सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया है। कहा गया था कि इन सभी 9 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत मिली थी। बाद में राजभवन के निर्देश पर न्यायिक जांच कराई गई। फिर उस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। कार्रवाई की जद में आए शिक्षकों पर नियुक्ति के समय न्यूनतम अर्हता पूरा न करने का आरोप था। साथ ही फर्जीवाड़े और नियुक्ति में आरक्षण नियमों की अनदेखी, निर्धारित मानकों का पालन न करने की बात भी सामने आई थी।

पूर्व कुलपति प्रो.माहरुख मिर्जा
Source Agency News
Village Post